"कुल कानन कुंडल मोर पखा, उर पे बनमाल विराजति है" , इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है ("kul kaanan kundal mor pakha, ur pe banamaal viraajati hai" , is pankti mein kaun sa alankaar hai)一 - www.studyandupdates.com

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"कुल कानन कुंडल मोर पखा, उर पे बनमाल विराजति है" , इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है ("kul kaanan kundal mor pakha, ur pe banamaal viraajati hai" , is pankti mein kaun sa alankaar hai)一

"कुल कानन कुंडल मोर पखा, उर पे बनमाल विराजति है" , इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है一

  1. अनुप्रास अलंकार
  2. यमक अलंकार
  3. श्लेष अलंकार
  4. वक्रोक्ति अलंकार

उत्तर- अनुप्रास अलंकार



अनुप्रास अलंकार :- अनुप्रास शब्द ‘अनु+प्रास’ इन 2 शब्दों से मिलकर बनता है। यहाँ पर ‘अनु’ शब्द का अर्थ ‘बार-बार‘ तथा ‘प्रास’ शब्द का अर्थ ‘वर्ण‘ होता है। जब किसी वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने पर जो चमत्कार होता है, उसे ‘अनुप्रास अलंकार’ कहते है।


'चरर मरर खुल गए अरर रवस्फुटो से' में अनुप्रास अलंकार है।

अलंकरोति इति अलंकार-जो अलंकृत करता है, वही अलंकार है। जहाँ एक शब्द या वर्ण बार-बार आता है वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। अनुप्रास का अर्थ है दोहराना। जहाँ कारण उत्पन्न होता है अर्थात काव्य में जहाँ एक ही अक्षर की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। 


जैसे- रघुपति राघव राजा राम। (र अक्षर की आवृत्ति)।








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